Prediabetes क्या है और इसे कैसे संभाला जा सकता है?
प्रीडायबिटीज वह अवस्था है जहां शुगर सामान्य से ऊपर है, पर डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंची। यही वह मोड़ है जहां जीवनशैली सबसे ज्यादा काम करती है।
प्रीडायबिटीज को अक्सर "थोड़ी सी शुगर बढ़ी है" कहकर टाल दिया जाता है। असल में यह एक चेतावनी है, और सबसे अच्छी बात यह है कि इस मोड़ पर आपके पास सबसे ज्यादा विकल्प होते हैं।
रेंज क्या है
| जांच | प्रीडायबिटीज की रेंज |
|---|---|
| फास्टिंग शुगर | 100 – 125 mg/dL |
| HbA1c | 5.7% – 6.4% |
| खाने के 2 घंटे बाद | 140 – 199 mg/dL |
हर लैब की रेंज थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए रिपोर्ट पर छपी रेंज देखें।
लक्षण क्या हैं?
ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नहीं होता। कुछ लोगों में गर्दन या बगल की त्वचा का कालापन दिखता है। इसीलिए प्रीडायबिटीज लगभग हमेशा जांच से ही पकड़ में आती है, महसूस होने से नहीं।
क्या करना चाहिए
- हफ्ते में ज्यादातर दिन 30 मिनट की गतिविधि — तेज चलना काफी है
- वजन ज्यादा हो तो थोड़ा सा भी कम करना असर दिखाता है
- चीनी वाले पेय बंद करना — यह अकेला बदलाव सबसे तेज असर दिखाता है
- हर खाने में प्रोटीन और फाइबर
- नींद पूरी करना
- डॉक्टर की बताई अवधि पर दोबारा जांच
कितना समय लगता है?
कोई तय अवधि नहीं है। कुछ लोगों में कुछ महीनों में रिपोर्ट सुधरने लगती है, कुछ में ज्यादा समय लगता है, और कुछ में यह डायबिटीज की ओर बढ़ती है। यही वजह है कि दोबारा जांच जरूरी है — अंदाजा लगाने के बजाय नंबर देखना।
क्या दवा की जरूरत होती है?
अक्सर पहले जीवनशैली पर काम किया जाता है। कुछ स्थितियों में डॉक्टर दवा भी शुरू कर सकते हैं — यह आपकी उम्र, वजन, दूसरी बीमारियों और रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या प्रीडायबिटीज डायबिटीज बन ही जाती है?+
जरूरी नहीं। बहुत से लोगों में जीवनशैली के बदलाव से रिपोर्ट सुधरती है। कुछ में यह आगे बढ़ती है, इसलिए नियमित जांच जरूरी है।
क्या इसमें मीठा पूरी तरह बंद करना पड़ता है?+
पूरी तरह नहीं। चीनी वाले पेय और रोज की मिठाई घटाना सबसे ज्यादा काम आता है।
दोबारा जांच कब करानी चाहिए?+
यह डॉक्टर तय करते हैं, आमतौर पर 6 से 12 महीने में। जोखिम ज्यादा हो तो जल्दी।
क्या पतले लोगों को भी प्रीडायबिटीज हो सकती है?+
हां। भारत में सामान्य वजन पर भी यह देखी जाती है, इसलिए जांच सिर्फ वजन देखकर तय न करें।