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विटामिन टेस्ट12 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें

Vitamin D टेस्ट: कब कराएं और रिपोर्ट कैसे पढ़ें

Vitamin D की जांच खून के एक सैंपल से होती है और इसे 25-hydroxy vitamin D कहा जाता है। खाली पेट होने की जरूरत नहीं होती।

ASलेखकAarogyaSutra Editorial Team

Vitamin D की जांच के लिए एक साधारण ब्लड टेस्ट होता है। रिपोर्ट में यह "25-hydroxy vitamin D" या "25(OH)D" के नाम से आता है — यही वह रूप है जो शरीर में जमा रहता है, इसलिए यही मापा जाता है।

नॉर्मल रेंज

श्रेणीरेंज (ng/mL)
कमी20 से कम
अपर्याप्त20 – 29
पर्याप्त30 और उससे ऊपर

हर लैब की रेंज थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए हमेशा अपनी रिपोर्ट पर छपी रेंज देखें।

किन्हें जांच करानी चाहिए

  • लंबे समय से थकान, हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द
  • बहुत कम धूप मिलने वाली जीवनशैली
  • हड्डी टूटने की घटना या हड्डियों की कमजोरी
  • पेट-आंत की ऐसी स्थिति जिसमें अवशोषण प्रभावित होता है
  • पहले कमी मिल चुकी हो और इलाज पूरा हुआ हो

जिनमें कोई लक्षण या खतरा नहीं है, उनमें रुटीन जांच जरूरी नहीं मानी जाती — यह डॉक्टर तय करते हैं।

तैयारी

कोई खास तैयारी नहीं। खाली पेट होना जरूरी नहीं है। अगर उसी समय दूसरी जांचें भी हो रही हों तो लैब की सलाह मानें। सप्लीमेंट ले रहे हों तो डॉक्टर को बताएं, क्योंकि इससे रिपोर्ट प्रभावित होती है।

इलाज के बाद दोबारा जांच

कमी मिलने पर डॉक्टर आमतौर पर इलाज पूरा होने के कुछ महीने बाद दोबारा जांच कराते हैं, यह देखने के लिए कि स्तर सुधरा या नहीं। बहुत जल्दी दोबारा जांच कराने से सही तस्वीर नहीं मिलती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या जांच खाली पेट करानी होती है?+

नहीं, इसके लिए खाली पेट होना जरूरी नहीं होता।

सप्लीमेंट लेते हुए जांच कराई तो रिपोर्ट सही आएगी?+

रिपोर्ट सप्लीमेंट की वजह से ऊंची आ सकती है। इसलिए डॉक्टर को बताना जरूरी है कि आप क्या ले रहे हैं।

इलाज के कितने समय बाद दोबारा जांच करानी चाहिए?+

यह डॉक्टर तय करते हैं, आमतौर पर इलाज पूरा होने के कुछ महीने बाद।

क्या बिना लक्षण के भी जांच करानी चाहिए?+

जिनमें कोई लक्षण या खतरा नहीं है, उनमें रुटीन जांच आमतौर पर जरूरी नहीं मानी जाती।

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