AarogyaSutraआपकी सेहत की आसान भाषा
विटामिन और मिनरल्स16 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें

शाकाहारियों के लिए Vitamin B12 के स्रोत क्या हैं?

B12 पौधों में स्वाभाविक रूप से नहीं मिलता। शाकाहारी खानपान में दूध, दही, पनीर और फोर्टिफाइड चीजें ही असली स्रोत हैं — और पूरी तरह वीगन खानपान में सप्लीमेंट लगभग जरूरी हो जाता है।

ASलेखकAarogyaSutra Editorial Team

भारत में शाकाहार बहुत आम है, और यही वजह है कि B12 की कमी यहां ज्यादा देखी जाती है। एक बात साफ समझ लेनी चाहिए: B12 पौधों में स्वाभाविक रूप से नहीं बनता।

शाकाहारी लोगों के असली स्रोत

  • दूध — रोज एक-दो गिलास
  • दही और छाछ
  • पनीर
  • अंडा, अगर आप खाते हैं
  • फोर्टिफाइड चीजें — कुछ अनाज, सोया दूध, न्यूट्रिशनल यीस्ट (लेबल देखें)

दूध-दही खाने वाले शाकाहारियों को कुछ मात्रा मिल जाती है, पर वह अक्सर सीमारेखा पर रहती है। इसीलिए लक्षण दिखने पर जांच करा लेना समझदारी है।

जो चीजें अक्सर गलत बताई जाती हैं

इंटरनेट पर कई बार यह कहा जाता है कि स्पिरुलिना, समुद्री शैवाल, टेम्पेह या कुछ मशरूम B12 दे देते हैं। इनमें जो तत्व मिलता है वह अक्सर शरीर के काम आने वाला रूप नहीं होता, और उस पर भरोसा करके कमी बनी रह सकती है। ऐसा कोई दावा दिखे तो उसे स्रोत मानकर न चलें।

वीगन खानपान में क्या करें?

अगर दूध, दही और अंडा भी नहीं है, तो खाने से B12 मिलने का कोई भरोसेमंद रास्ता नहीं बचता। ऐसे में दो ही विकल्प हैं — नियमित रूप से फोर्टिफाइड चीजें, या डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट। यह कोई कमजोरी नहीं, बस खानपान की एक जरूरत है।

"फोर्टिफाइड" कैसे पहचानें

पैकेट के पीछे पोषण तालिका में "Vitamin B12" या "Cyanocobalamin" लिखा होगा, मात्रा के साथ। जहां नहीं लिखा, वहां मान लेना ठीक नहीं — हर सोया दूध या हर अनाज फोर्टिफाइड नहीं होता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या स्पिरुलिना से B12 मिल जाता है?+

उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उसमें मिलने वाला रूप अक्सर शरीर के काम नहीं आता।

रोज कितना दूध पर्याप्त है?+

दूध-दही से कुछ मात्रा मिलती है, पर पर्याप्त है या नहीं यह जांच से ही पता चलता है। लक्षण हों तो टेस्ट कराएं।

क्या B12 का सप्लीमेंट रोज लेना पड़ता है?+

यह कमी की मात्रा और वजह पर निर्भर करता है। खुराक और अवधि डॉक्टर तय करते हैं।

क्या बच्चों में भी यह कमी होती है?+

हां, खासकर पूरी तरह शाकाहारी परिवारों में। बच्चों की जांच और खुराक हमेशा डॉक्टर से ही तय कराएं।

संबंधित लेख