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भारतीय आहार24 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें

भारतीय थाली: सेहतमंद जीवन का आधार

पारंपरिक भारतीय थाली अपने आप में एक संतुलित डाइट है — दाल, सब्जी, रोटी, दही, सलाद। दिक्कत थाली में नहीं, उसके बदले हुए अनुपात में आई है।

ASलेखकAarogyaSutra Editorial Team

विदेशी सुपरफूड की तलाश में अक्सर यह भुला दिया जाता है कि पारंपरिक भारतीय थाली अपने आप में एक अच्छी तरह संतुलित डाइट है। उसमें कुछ जोड़ने की जरूरत नहीं — अनुपात ठीक करने की जरूरत है।

थाली में क्या-क्या और क्यों

हिस्साक्या देता है
दालप्रोटीन, फाइबर
रोटी / चावलऊर्जा
सब्जीविटामिन, मिनरल, फाइबर
दही / छाछप्रोटीन, कैल्शियम
सलादफाइबर, पानी
घी / तेलजरूरी फैट
अचार / चटनीस्वाद — पर नमक यहीं से सबसे ज्यादा आता है

दाल-चावल या दाल-रोटी का मेल खास तौर पर काम का है — दाल और अनाज मिलकर प्रोटीन की गुणवत्ता बेहतर कर देते हैं। यह सैकड़ों साल पुराना संयोजन है, और आज भी उतना ही सही है।

अनुपात कहां बिगड़ा

आज की थाली में अनाज का हिस्सा बहुत बढ़ गया है और दाल-सब्जी का घट गया है — तीन-चार रोटी या भरपूर चावल के साथ थोड़ी सी दाल। साथ ही तेल, चीनी और बाहर का खाना बढ़ा है। बदलाव खाने में नहीं, मात्रा में आया है।

थाली को वापस संतुलन में लाना

  • दाल की कटोरी बड़ी करें, रोटी एक कम कर दें
  • सब्जी को साइड डिश नहीं, आधी थाली बनाएं
  • रोज दही या छाछ रखें
  • सलाद पहले खाएं, बाद में नहीं
  • अचार-पापड़ रोज नहीं, कभी-कभार

अनाज बदलते रहें

सिर्फ गेहूं पर टिके रहने के बजाय हफ्ते में कुछ दिन बाजरा, ज्वार, रागी या दलिया शामिल करें। ये मोटे अनाज पहले हर घर में चलते थे, और इनमें फाइबर और खनिज ज्यादा होते हैं। यह सबसे आसान सुधार है और इसमें कुछ नया खरीदने की भी जरूरत नहीं।

क्षेत्रीय थालियां

इडली-सांभर, खिचड़ी-कढ़ी, पखाला, छोले-चावल, मछली-भात — हर क्षेत्र की थाली में यही संतुलन अलग रूप में मौजूद है। "हेल्दी खाना" के लिए अपनी क्षेत्रीय थाली छोड़कर कुछ और अपनाने की जरूरत नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रोज चावल खाना ठीक है?+

हां, मात्रा सही हो और साथ में दाल, सब्जी और दही हो। कई क्षेत्रों में यह रोज का खाना है।

क्या घी थाली से हटा देना चाहिए?+

नहीं। शरीर को कुछ फैट चाहिए। मात्रा सीमित रखें, हटाएं नहीं।

मोटे अनाज कैसे शुरू करें?+

हफ्ते में दो-तीन दिन से शुरू करें — बाजरे की रोटी, ज्वार की भाकरी या रागी का दलिया।

क्या थाली में सब कुछ एक साथ होना जरूरी है?+

हर वक्त नहीं, पर दिनभर में सब कुछ आ जाए — यही असल संतुलन है।

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